रेशम की शादी
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रेशम की शादी थी।माँ-बाप ने बड़ी दौड़े-धूप के बाद शादी तय की थी।बारात जनवासे में आ चुकी थी।सो घर में दौड़-धूप मची हुई थी।कहीं कोई कहीं कोई भाग रहा था।रेशम के दिल की धड़कन तेज हो गई थी।हालाँकि लड़का उसने देखा था लेकिन स्वभाव कैसा है लड़के का?नहीं जानती थी।ससुराल के लोग देखने में तो सज्जन लगते थे हकीकत क्या है भगवान जाने।यही सब सोच रही थी।चूँकि लड़का दिल्ली का रहने वाला है इसलिये उसके बारे में अधिक नहीं पता था सिवाय इसके कि वह सुन्दर है और अच्छी नौकरी में है।लेकिन स्वभाव के बारे में वह असमंजस की स्थिति में थी।बारात दरवाजे पहुंची तो बाराती नाच-कूद रहे थे।द्वार-चार लगने से पहले रेशम को अक्षत के चावल फेंकने के लिए लाया गया।वह चावल फेंक कर वापस चली गई।
लेकिन मन लड़के में लगा था।कैसा होगा उसका जीवन साथी?द्वार-चार खत्म हुआ।लड़का वर माला के स्टेज पर आ गया।हँसी-खुशी यह रस्म भी पूरी हो गई।लड़का फिलहाल उसे शरीफ ही लग रहा था।वह भविष्य के सपनों डूबी बहुत खुश थी जैसा जीवन-साथी चाहती थी वैसा ही लगता है।हँस-मुख हाजिर जवाब।एक लड़की को और क्या चाहिए भला।
रात में शादी के मण्डप में दुल्हा आ गया।रस्में अदा होने लगीं।सभी कुछ शान्त तथा खुशहाल माहौल में हो रहा था कहीं कोई कहा-सुनी नहीं।लोग लड़के वालों की तारीफों के पुल बाँध रहे थे।
कुछ देर बाद दुल्हन रेशम को शादी के मण्डप में लाया गया।शादी होनी शुरू हो गई।इसी बीच रेशम को लड़के के मुंह से शराब की गंध लग गयी।वह मण्डप से उठ गई।बोली,"मैं शराबी से शादी नहीं करूंगी।यह तो शराब पिये हुआ है।"
चारों ओर सन्नाटा छा गया।लोगों में कानाफूसी होने लगी,"कैसी लड़की है?माँ-बाप का नाम डूबो दिया।"
माँ-बाप ने लाख दुहाई दी,"मेरी इज्ज़त की बात है।बारात वापस हो गयी तो हम कहीं मुंह दिखाने नहीं रहेंगे।बहुत बेइज्जती हो जायेगी।जगहँसाई में हम जीने लायक नहीं रहेंगे।आत्महत्या कर लेंगे।"
रेशम उठकर अपने कमरे में आ गई।माँ भी पीछे-पीछे आ गयीं।रेशम ने माँ से बोली,"माँ तिल-तिल कर मरने से अच्छा है मेरा एकदम से मर जाना।क्या तुम्हारी बेटी इसके साथ तिल-तिल कर मरे तुम्हें मंजूर है?"
माँ ने कहा, "अगर बारात वापस हो गयी तो तुझसे शादी कौन करेगा करम जली?"
रेशम ने कहा,"तो क्या तुम चाहती हो मैं शराबी से शादी कर लूँ ताकि रोज मार खाऊँ?"
माँ निरुत्तर हो गयी।तभी रेशम के बाप आ गये बोले,"रहने दो रेशम की माँ, इसे मत समझाओ।लड़का वाकई शराबी है।रोज ही पीता है।अभी-अभी कुछ लोगों ने बताया है।गलती मेरी ही है मैं दूरी की वजह से लड़के के बारे में ठीक से पता नहीं लगा पाया।रेशम ठीक कर रही है।"
माँ बोली,"जो बारात आई है उसका क्या होगा? "
पिता बोले,"उनको मना कर दिया है।बहुत झगड़ा हुआ लेकिन इसके मतलब नहीं कि अपनी बेटी को हम आग में ढकेल दें।"
माँ बोली,"इसकी शादी?"
पिताजी बोले,"दूसरा लड़का खोजूंगा।जमाना बहुत आगे है।कोई न कोई लड़का मिल ही जायेगा।लेकिन अब की खूब ठोंक बजा कर शादी तय करूँगा।"
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रेशम की शादी थी।माँ-बाप ने बड़ी दौड़े-धूप के बाद शादी तय की थी।बारात जनवासे में आ चुकी थी।सो घर में दौड़-धूप मची हुई थी।कहीं कोई कहीं कोई भाग रहा था।रेशम के दिल की धड़कन तेज हो गई थी।हालाँकि लड़का उसने देखा था लेकिन स्वभाव कैसा है लड़के का?नहीं जानती थी।ससुराल के लोग देखने में तो सज्जन लगते थे हकीकत क्या है भगवान जाने।यही सब सोच रही थी।चूँकि लड़का दिल्ली का रहने वाला है इसलिये उसके बारे में अधिक नहीं पता था सिवाय इसके कि वह सुन्दर है और अच्छी नौकरी में है।लेकिन स्वभाव के बारे में वह असमंजस की स्थिति में थी।बारात दरवाजे पहुंची तो बाराती नाच-कूद रहे थे।द्वार-चार लगने से पहले रेशम को अक्षत के चावल फेंकने के लिए लाया गया।वह चावल फेंक कर वापस चली गई।
लेकिन मन लड़के में लगा था।कैसा होगा उसका जीवन साथी?द्वार-चार खत्म हुआ।लड़का वर माला के स्टेज पर आ गया।हँसी-खुशी यह रस्म भी पूरी हो गई।लड़का फिलहाल उसे शरीफ ही लग रहा था।वह भविष्य के सपनों डूबी बहुत खुश थी जैसा जीवन-साथी चाहती थी वैसा ही लगता है।हँस-मुख हाजिर जवाब।एक लड़की को और क्या चाहिए भला।
रात में शादी के मण्डप में दुल्हा आ गया।रस्में अदा होने लगीं।सभी कुछ शान्त तथा खुशहाल माहौल में हो रहा था कहीं कोई कहा-सुनी नहीं।लोग लड़के वालों की तारीफों के पुल बाँध रहे थे।
कुछ देर बाद दुल्हन रेशम को शादी के मण्डप में लाया गया।शादी होनी शुरू हो गई।इसी बीच रेशम को लड़के के मुंह से शराब की गंध लग गयी।वह मण्डप से उठ गई।बोली,"मैं शराबी से शादी नहीं करूंगी।यह तो शराब पिये हुआ है।"
चारों ओर सन्नाटा छा गया।लोगों में कानाफूसी होने लगी,"कैसी लड़की है?माँ-बाप का नाम डूबो दिया।"
माँ-बाप ने लाख दुहाई दी,"मेरी इज्ज़त की बात है।बारात वापस हो गयी तो हम कहीं मुंह दिखाने नहीं रहेंगे।बहुत बेइज्जती हो जायेगी।जगहँसाई में हम जीने लायक नहीं रहेंगे।आत्महत्या कर लेंगे।"
रेशम उठकर अपने कमरे में आ गई।माँ भी पीछे-पीछे आ गयीं।रेशम ने माँ से बोली,"माँ तिल-तिल कर मरने से अच्छा है मेरा एकदम से मर जाना।क्या तुम्हारी बेटी इसके साथ तिल-तिल कर मरे तुम्हें मंजूर है?"
माँ ने कहा, "अगर बारात वापस हो गयी तो तुझसे शादी कौन करेगा करम जली?"
रेशम ने कहा,"तो क्या तुम चाहती हो मैं शराबी से शादी कर लूँ ताकि रोज मार खाऊँ?"
माँ निरुत्तर हो गयी।तभी रेशम के बाप आ गये बोले,"रहने दो रेशम की माँ, इसे मत समझाओ।लड़का वाकई शराबी है।रोज ही पीता है।अभी-अभी कुछ लोगों ने बताया है।गलती मेरी ही है मैं दूरी की वजह से लड़के के बारे में ठीक से पता नहीं लगा पाया।रेशम ठीक कर रही है।"
माँ बोली,"जो बारात आई है उसका क्या होगा? "
पिता बोले,"उनको मना कर दिया है।बहुत झगड़ा हुआ लेकिन इसके मतलब नहीं कि अपनी बेटी को हम आग में ढकेल दें।"
माँ बोली,"इसकी शादी?"
पिताजी बोले,"दूसरा लड़का खोजूंगा।जमाना बहुत आगे है।कोई न कोई लड़का मिल ही जायेगा।लेकिन अब की खूब ठोंक बजा कर शादी तय करूँगा।"
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