Sunday, December 1, 2019

इन्सान क्या है

इन्सान क्या है

Priyanka Reddy



इन्सान क्या है? एक जानवर ही तो है। अगर इसे जानवर से भी गया-गुजरा कहा जाये तो अतिश्योक्ति न होगी, जानवर भी कच्ची उम्र की मादा से सम्पर्क नहीं बनाता और इन्सान कामातुर होकर यह सब नहीं देखता, उसे तो बस हवस मिटानी होती है आखिर आसिफा आदि काण्ड क्या सिद्ध करतें हैं। एक नर जानवर जब एक मादा जानवर का प्रयोग कर लेता है तो दूसरा नर जानवर उसका प्रयोग नहीं करता किन्तु इन्सान यह सब नहीं देखता, कामांध मादा जानवर का ही नर जानवर प्रयोग करता है परन्तु इन्सान यह सब नहीं देखता उसे तो बस हवस मिटानी होती है। हाल ही में हुआ हैदराबाद काण्ड यही सिद्ध करता है। इन बलात्कारियों की सजा एक है,  जैसे को तैसा। लेकिन जिस कानून में बलात्कारियों को भी बचाव के लिए वकील मिलता हो वहाॅ यह सम्भव नहीं, इसका एक ही उपाय है उस वकील को भी जैसे को तैसा।

Saturday, November 23, 2019

जमाना बहुत बुरा आया है

जमाना बहुत बुरा आया है
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Broken family

जमाना बहुत बुरा आया है,
भाई को हम भाई नहीं मानते,
माँ-बाप की इज्ज़त नहीं करते,
इन प्यारे रिश्ते को तोड़कर,
गैरों को अपना लेते हैं।
और कहतें हैं,
मेरा व्यवहार बहुत है,
समाज में मेरा नाम बहुत है।
हमसे अच्छी मेरी पत्नी है,
अपने बाप को बाप समझती,
अपनी माँ को माँ समझती,
और भाई को भाई मानती,
हमको भी मजबूर कर देती,
यह तो अच्छी बात है,
हम ऐसा ही करतें हैं,
इन सबकी इज्ज़त करतें हैं,
क्योंकि ये इज्ज़त के लायक हैं।
पर हम क्यों भूल जातें हैं,
मेरा भाई मेरा भाई है,
वह दुश्मन नहीं हो सकता,
आखिर मेरा ही खून है,
मेरे माँ-बाप घर के कचरे नहीं हैं,
क्योंकि ये पूज्यनीय हैं।
जब भी  समाज पूछेगा हमसे,
हमको कहना ही पड़ेगा,
यह मेरा ही भाई है,
और ये ही मेरे माँ-बाप हैं,
यह बिल्कुल ही सत्य है,
यही पहचान है मेरी।
इसके बावजूद भी हम,
कितने मूर्ख होतें हैं,
भाई को दुश्मन मानकर,
माँ-बाप को कचरा समझकर,
सोचतें हैं मेरे बेटे बड़े होकर,
मेरी सेवा करेंगे।।
        मूर्ख

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

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Thursday, November 21, 2019

                   यही बनारस है
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जी हाँ,
भगवान् शिव के त्रिशूल पर टिकी,शेष नाग के फन पर बसी यही गलियों और मन्दिरों की नगरी काशी है।काशी यानी बनारस वरूणा तथा अस्सी नदियों के बीच की नगरी वाराणसी।धर्म का अवलम्ब,हिन्दू संस्कृति की पहचान है।गलियों में बनी बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं को देखकर आप अचम्भित रह जायेंगे जिन गलियों में साइकिल बाइक मुश्किल हो उनमें बड़ी वाहनों से अट्टालिकाओं के लिए सामान लाना आश्चर्य जनक है।कई किलोमीटर तक गंगा किनारे पक्के घाटों का होना आश्चर्य में डाल देता है।काशी की सुबह शिव शंकर से शुरू होती है।सैलानिओं की भीड़ देखते ही बनती है।सबका मकसद एक "हिन्दू संस्कृति का अध्ययन"
यहाँ श्मशान घाट हैं एक,"हरिश्चंद्र घाट"दूसरा "मणिकर्णिका घाट"।