इस मंच के माध्यम से मैं, अपने जीवन में घटित हुए छोटे-बड़े अनुभवों और सीख दे जाने वाले लम्हो का साँझा कविता और लघु कहानियो के द्वारा करने की कोशिश कर रहा हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएंगे...सुधीर श्रीवास्तव
Sunday, December 1, 2019
इन्सान क्या है
नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
Saturday, November 23, 2019
जमाना बहुत बुरा आया है
जमाना बहुत बुरा आया है
जमाना बहुत बुरा आया है,
भाई को हम भाई नहीं मानते,
माँ-बाप की इज्ज़त नहीं करते,
इन प्यारे रिश्ते को तोड़कर,
गैरों को अपना लेते हैं।
और कहतें हैं,
मेरा व्यवहार बहुत है,
समाज में मेरा नाम बहुत है।
हमसे अच्छी मेरी पत्नी है,
अपने बाप को बाप समझती,
अपनी माँ को माँ समझती,
और भाई को भाई मानती,
हमको भी मजबूर कर देती,
यह तो अच्छी बात है,
हम ऐसा ही करतें हैं,
इन सबकी इज्ज़त करतें हैं,
क्योंकि ये इज्ज़त के लायक हैं।
पर हम क्यों भूल जातें हैं,
मेरा भाई मेरा भाई है,
वह दुश्मन नहीं हो सकता,
आखिर मेरा ही खून है,
मेरे माँ-बाप घर के कचरे नहीं हैं,
क्योंकि ये पूज्यनीय हैं।
जब भी समाज पूछेगा हमसे,
हमको कहना ही पड़ेगा,
यह मेरा ही भाई है,
और ये ही मेरे माँ-बाप हैं,
यह बिल्कुल ही सत्य है,
यही पहचान है मेरी।
इसके बावजूद भी हम,
कितने मूर्ख होतें हैं,
भाई को दुश्मन मानकर,
माँ-बाप को कचरा समझकर,
सोचतें हैं मेरे बेटे बड़े होकर,
मेरी सेवा करेंगे।।
मूर्ख
आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
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नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
Thursday, November 21, 2019
यही बनारस है
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जी हाँ,
भगवान् शिव के त्रिशूल पर टिकी,शेष नाग के फन पर बसी यही गलियों और मन्दिरों की नगरी काशी है।काशी यानी बनारस वरूणा तथा अस्सी नदियों के बीच की नगरी वाराणसी।धर्म का अवलम्ब,हिन्दू संस्कृति की पहचान है।गलियों में बनी बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं को देखकर आप अचम्भित रह जायेंगे जिन गलियों में साइकिल बाइक मुश्किल हो उनमें बड़ी वाहनों से अट्टालिकाओं के लिए सामान लाना आश्चर्य जनक है।कई किलोमीटर तक गंगा किनारे पक्के घाटों का होना आश्चर्य में डाल देता है।काशी की सुबह शिव शंकर से शुरू होती है।सैलानिओं की भीड़ देखते ही बनती है।सबका मकसद एक "हिन्दू संस्कृति का अध्ययन"
यहाँ श्मशान घाट हैं एक,"हरिश्चंद्र घाट"दूसरा "मणिकर्णिका घाट"।
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जी हाँ,
भगवान् शिव के त्रिशूल पर टिकी,शेष नाग के फन पर बसी यही गलियों और मन्दिरों की नगरी काशी है।काशी यानी बनारस वरूणा तथा अस्सी नदियों के बीच की नगरी वाराणसी।धर्म का अवलम्ब,हिन्दू संस्कृति की पहचान है।गलियों में बनी बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं को देखकर आप अचम्भित रह जायेंगे जिन गलियों में साइकिल बाइक मुश्किल हो उनमें बड़ी वाहनों से अट्टालिकाओं के लिए सामान लाना आश्चर्य जनक है।कई किलोमीटर तक गंगा किनारे पक्के घाटों का होना आश्चर्य में डाल देता है।काशी की सुबह शिव शंकर से शुरू होती है।सैलानिओं की भीड़ देखते ही बनती है।सबका मकसद एक "हिन्दू संस्कृति का अध्ययन"
यहाँ श्मशान घाट हैं एक,"हरिश्चंद्र घाट"दूसरा "मणिकर्णिका घाट"।
नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
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