Wednesday, July 31, 2019

प्रार्थना

ऊँ श्री विष्णुयाय नमः
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जय श्री हरि

डूब रहा मैं भवसागर में,
भवसागर यह पार करा दो स्वामी,
बड़ा विकट यह भवसागर है,
तुम ही एक खेवनहार हमारे हो।
कष्टों की लहरें आतीं हैं,
दुःखों का ज्वार सा आता है,
तुम ही इसके कारक हो,
तुम ही तारणहार हो स्वामी।
रावण से पृथ्वी डोली थी,
राम बनकर तुम आये थे,
कंस का अंत करने को,
कृष्ण बनकर तुम आये थे स्वामी।
दुष्ट जब नृत्य करते धरती पर,
तुम रूप बदल-बदल कर आते हो,
करके संहार तुम दुष्टों का,
चले क्यों जाते हो भगवन्?

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