दुःख है इस बात का
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मुझे दुःख इस बात का नहीं,
कि,
लोगों ने धोखा दिया,
दुःख तो इस बात का है,
कि,
अपनों ने ही धोखा दिया।
जिन्हें समझता था अपना,
वह पराये हो गये,
और,
जो पराये थे,
पराये ही रह गये।
न पराये अपने हो सके,
न अपने ही अपने रह सके,
जाने क्या कमी है मुझमें,
किसी को न अपना कर सका।
अगर हो पता तुम्हें,
तो,
मुझमें ऐसी क्या कमी है,
कि,
हर व्यक्ति मुझसे पराया हो गया,
बता दो मुझे ऐ दोस्त,
कमी अपनी दूर कर सकूं।
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मुझे दुःख इस बात का नहीं,
कि,
लोगों ने धोखा दिया,
दुःख तो इस बात का है,
कि,
अपनों ने ही धोखा दिया।
जिन्हें समझता था अपना,
वह पराये हो गये,
और,
जो पराये थे,
पराये ही रह गये।
न पराये अपने हो सके,
न अपने ही अपने रह सके,
जाने क्या कमी है मुझमें,
किसी को न अपना कर सका।
अगर हो पता तुम्हें,
तो,
मुझमें ऐसी क्या कमी है,
कि,
हर व्यक्ति मुझसे पराया हो गया,
बता दो मुझे ऐ दोस्त,
कमी अपनी दूर कर सकूं।
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