Tuesday, November 19, 2019

                    एकाकी जीवन
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 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।एकाकी जीवन कैसा होता है उसे तब पता चलता है जब वह एकान्त वास में पड़ता है।तब वह समझ सकता है एकांत वास कैसा होता है।जब उसके पास कोई काम न हो जब बात करने वाला भी कोई न हो।वह अकेला हो एक दम अकेला।जी हाँ बात कर रहा हूॅ अपनी।घर में हूॅ।पहले  18 सदस्यों का परिवार था।ईश्वर की माया कहें या कोप पाँच ही सदस्य परिवार में हैं इस समय।जिसमें से भी दो सदस्य अस्पताल में हैं एक बिमारी के कारण भर्ती हैं दूसरा उनके सहायक के रूप में रहता है।छोटा भाई ड्यूटो पर तो भतीजा घर अस्पताल एक किये रहता है।अब घर में बचें तीन सदस्य।दो औरतें एक मैं खुद।न बोलने वाला कोई न चालने वाला कोई घर में अकेला बैंठे-बैंठे अब समझने लगा हूॅ अकेलापन कैसा होता है।

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