Wednesday, August 21, 2019

फुलवा

फुलवा
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gardener

मैं जब कभी फुलवा को देखता हूॅ वह अपनी बागवानी में दिखती। पौधों और फूलों में व्यस्त यही उसकी दुनिया है। किसी से अधिक न बोलती है, न कोई मतलब रखती है। छोटी सी दुनिया है उसकी। हालांकि बात आम है लेकिन जब से लोगों के मुंह से मैंने सुना है कि पहले बहुत हँस-मुख थी और सबसे प्रेम व्यवहार रखती थी लेकिन बच्चा न होने के कारण जब से उसके पति ने उसे छोड़ दिया है। वह रहस्यमयी हो गई है। शायद टोना-टोटका भी करती है। इसलिये उससे कोई बोलता भी नहीं न ही मतलब रखता है। सुनकर मेरे दिल में न जाने क्यों उसके प्रति रुचि पैदा हो गई। आज के समाज में टोना-टोटका! मैं नहीं मानता हूॅ। हालाँकि कोई यह न बता सका कि उसने कब किस पर टोना किया है। मैं एक जिज्ञासु प्रकृति का आदमी हूॅ, अतः उसकी टोना-टोटके की रहस्यमयी दुनिया को जानने की इच्छा पैदा हो गई। लेकिन पता कैसे हो? सोचने लगा।
एक दिन उसकी बागवानी में पहुंच गया। वह फूलों में व्यस्त थी, मुझपर कोई ध्यान नहीं दिया। उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए मैंने कहा,"सुनिये।"
उसने मुझे आश्चर्य से देखा।सुन्दर थी जवान थी। मैं बोला,"पूजा के लिए एक फूल चाहिए।"
वह बोली, "मैं फूल तो किसी को देती नहीं। लेकिन चूँकि आज आप पहली बार आयें हैं, इसलिये देती हूॅ। वैसे ही यहाँ कोई नहीं आता, आपको देख कर आश्चर्य हो रहा है, क्या मेरे बारे में आपको किसी ने बताया नही?"
मैं बोला,"आज के जमाने में मैं उन बातों नहीं मानता।"
उसने एक फूल दिया। मैं लेकर चल पड़ा अपनी दुकान पर पहुंच कर उस फूल को गणेश-लक्ष्मी की तस्वीर पर चढ़ा दिया। मैंनें अनुभव किया कि आज मेरी दुकान अन्य दिनों अपेक्षा अधिक चली। सामान बहुत बिका आय भी बहुत हुई।
फिर तो सिलसिला चल पड़ा मैं रोज एक फूल फुलवा से माँग कर लाता दुकान पर चढ़ाता। मेरी आय बढ़ने लगी।मुझे शंका हुई यह फुलवा का टोना तो नहीं। किन्तु बढ़ती आय के लालच में मैं फुलवा से फूल लेता रहा। धीरे-धीरे हमारी और उसकी घनिष्ठता बढ़ती गई। मैं बिना पूछे ही फूल तोड़ने लगा।
कुछ दिनों के बाद फुलवा मुझसे खुल गयी बोली,"तुमने मेरे बारे में सुना तो होगा ही कि मैं टोना-टोटका करतीं हूॅ। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। मुझे यह सब नहीं आता, न जाने क्यों लोग हवा उड़ातें हैं। मुझे बच्चों से बहुत प्रेम है जब बच्चा न होने के कारण मेरे आदमी ने मुझे छोड़ दिया है, मैं इन फूलों से प्रेम करती हूॅ। यही मेरे बच्चे हैं।"
मैंने उसे अपनी बढ़ती आय के बारे में बताया तो उसने कहा, "सब ईश्वर की माया है, मैं तो बस इन फूलों को अपनी औलाद मानती हूॅ और औलाद माँ का नाम रोशन करतें हैं डुबोते नहीं।"
कुछ दिनों तक मेरे फूलों को लेने का क्रम चलता रहा। मैं अब अनुभव करने लगा लोग हम दोनों की घनिष्ठता को शक की नजरों से देख रहें हैं। मैंने फुलवा से फूल लेना बन्द कर दिया। दूसरे रास्ते से दुकान जाने लगा। आज उस रास्ते पर बहुत जाम लगा था अतः पुराने रास्ते से दुकान जा रहा था। फुलवा ने मुझे देख लिया आवाज लगाई मैं रूक गया तो बोली,"तुम कई दिनों से आये नहीं, क्या तुमने पूजा छोड़ दी है?"
मैंने उसे पूरी बात बताई कि,"लोग हम पर शक कर रहें हैं।"
वह बोली, "यह दुनिया है ऐसे ही शक करती है, इसका बस चले तो भाई-बहन को भी ना छोड़े। खैर, मैंने तुम्हें अपना भाई माना है, तुम्हारी इच्छा मुझे जो समझो।"
मेरे पास कोई उत्तर न था।लेकिन दूसरे दिन से उसकी बागवानी से फूल लेने लगा।

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

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           तुममें क्या बात है?
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तुममें क्या बात है ज़ानम,
हम नहीं जानते,
दिल क्यों तेरी यादों में खोया रहता है,
हम नहीं जानते।
सामने पड़ जाते हो जब भी,
एक घबड़ाहट सी होती है,
कुछ कहने का मन होता है,
पर,
ओंठ काँपने लगतें हैं।
दिल की बातें दिल में रहतीं हैं,
जुबां पर नहीं आतीं हैं,
राह तुम्हारी देखा करतें हैं,
अगर राह में पड़ जाते हो,
हम राह बदल देतें हैं क्यों?
क्या बात है तुममें ज़ानम,
तुम याद बहुत आते हो,
ख्वाबों में तुम आते हो,
सपने तुम्हारे आते हैं,
दिल यह बेचैन रहता है,
तुमसे मिल जाने को,
जब तुम दिख जाते हो,
ऑखें झुक जातीं हैं क्यों?
                       रेशम की शादी
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रेशम की शादी थी।माँ-बाप ने बड़ी दौड़े-धूप के बाद शादी तय की थी।बारात जनवासे में आ चुकी थी।सो घर में दौड़-धूप मची हुई थी।कहीं कोई कहीं कोई भाग रहा था।रेशम के दिल की धड़कन तेज हो गई थी।हालाँकि लड़का उसने देखा था लेकिन स्वभाव कैसा है लड़के का?नहीं जानती थी।ससुराल के लोग देखने में तो सज्जन लगते थे हकीकत क्या है भगवान जाने।यही सब सोच रही थी।चूँकि लड़का दिल्ली का रहने वाला है इसलिये उसके बारे में अधिक नहीं पता था सिवाय इसके कि वह सुन्दर है और अच्छी नौकरी में है।लेकिन स्वभाव के बारे में वह असमंजस की स्थिति में थी।बारात दरवाजे पहुंची तो बाराती नाच-कूद रहे थे।द्वार-चार लगने से पहले रेशम को अक्षत के चावल फेंकने के लिए लाया गया।वह चावल फेंक कर वापस चली गई।
लेकिन मन लड़के में लगा था।कैसा होगा उसका जीवन साथी?द्वार-चार खत्म हुआ।लड़का वर माला के स्टेज पर आ गया।हँसी-खुशी यह रस्म भी पूरी हो गई।लड़का फिलहाल उसे शरीफ ही लग रहा था।वह भविष्य के सपनों डूबी बहुत खुश थी जैसा जीवन-साथी चाहती थी वैसा ही लगता है।हँस-मुख हाजिर जवाब।एक लड़की को और क्या चाहिए भला।
रात में शादी के मण्डप में दुल्हा आ गया।रस्में अदा होने लगीं।सभी कुछ शान्त तथा खुशहाल माहौल में हो रहा था कहीं कोई कहा-सुनी नहीं।लोग लड़के वालों की तारीफों के पुल बाँध रहे थे।
कुछ देर बाद दुल्हन रेशम को शादी के मण्डप में लाया गया।शादी होनी शुरू हो गई।इसी बीच रेशम को लड़के के मुंह से शराब की गंध लग गयी।वह मण्डप से उठ गई।बोली,"मैं शराबी से शादी नहीं करूंगी।यह तो शराब पिये हुआ है।"
चारों ओर सन्नाटा छा गया।लोगों में कानाफूसी होने लगी,"कैसी लड़की है?माँ-बाप का नाम डूबो दिया।"
माँ-बाप ने लाख दुहाई दी,"मेरी इज्ज़त की बात है।बारात वापस हो गयी तो हम कहीं मुंह दिखाने नहीं रहेंगे।बहुत बेइज्जती हो जायेगी।जगहँसाई में हम जीने लायक नहीं रहेंगे।आत्महत्या कर लेंगे।"
रेशम उठकर अपने कमरे में आ गई।माँ भी पीछे-पीछे आ गयीं।रेशम ने माँ से बोली,"माँ तिल-तिल कर मरने से अच्छा है मेरा एकदम से मर जाना।क्या तुम्हारी बेटी इसके साथ तिल-तिल कर मरे तुम्हें मंजूर है?"
माँ ने कहा, "अगर बारात वापस हो गयी तो तुझसे शादी कौन करेगा करम जली?"
रेशम ने कहा,"तो क्या तुम चाहती हो मैं शराबी से शादी कर लूँ ताकि रोज मार खाऊँ?"
माँ निरुत्तर हो गयी।तभी रेशम के बाप आ गये बोले,"रहने दो रेशम की माँ, इसे मत समझाओ।लड़का वाकई शराबी है।रोज ही पीता है।अभी-अभी कुछ लोगों ने बताया है।गलती मेरी ही है मैं दूरी की वजह से लड़के के बारे में ठीक से पता नहीं लगा पाया।रेशम ठीक कर रही है।"
माँ बोली,"जो बारात आई है उसका क्या होगा? "
पिता बोले,"उनको मना कर दिया है।बहुत झगड़ा हुआ लेकिन इसके मतलब नहीं कि अपनी बेटी को हम आग में ढकेल दें।"
माँ बोली,"इसकी शादी?"
पिताजी बोले,"दूसरा लड़का खोजूंगा।जमाना बहुत आगे है।कोई न कोई लड़का मिल ही जायेगा।लेकिन अब की खूब ठोंक बजा कर शादी तय  करूँगा।"