Tuesday, October 8, 2019

यही दुनिया है
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दूसरों में कमी खोजतें सभी,
अपनी कमी कोई खोजता ही नहीं,
दूसरों का किया याद रखतें हैं सभी,
अपना किया याद रखतें ही नहीं।
दूसरा गलत रहता है सोचतें हैं सभी,
खुद को गलत कोई समझता नहीं,
कैसा स्वभाव है मानव का यह,
मेरी समझ कुछ आता नहीं।
याद आतीं हैं अपनी अच्छाइयां ही,
दूसरों की अच्छाइयां याद आतीं नहीं,
हम ही सही हैं सोचतें हैं सभी,
दूसरा भी सही है हम सोचतें नहीं।
गर बुराई खोंजे खुद की हम,
तो खुद में केवल बुराई ही नजर आयेगी,
और दूसरे की अच्छाइयां खोंजे अगर,
तो दूसरों की केवल अच्छाइयां ही नजर आयेंगी।।

Sunday, October 6, 2019

                       बँटवारा -2
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जगदीश प्रसाद जी धनाढ्य थे।बात बहुत पहले की है।भगवान का दिया जगदीश प्रसाद जी के पास कुछ था जो आज से लगभग साठ-सत्तर पहले एक आदमी के पास होना चाहिए।मकान था या कोठी।आगे बहुत बड़ी बगिया जिसमें तरह-तरह के पेड़-पौधे थे।फिर मकान।मकान में बहुत बड़ा सा ऑगन इतना बड़ा कि जगदीश प्रसाद जी अपने चार लड़कों तथा दों बेटियों की शादी उसी मकान से किया था।फिर उसके बाद दों बेटों ने अपनी संतानों(जिसमें से एक बेटे को तीन पुत्र चार बेटियां थीं दूसरे बेटे की दों लड़कियां थीं)की शादी भी उसी मकान से की।तीसरे लड़के ने अपना मकान बनवा लिया।चौथा लड़का बाहर नौकरी कर रहा था।जगदीश प्रसाद जी की एक पत्नी स्वर्ग सिधार गयीं थीं जिनसे सब बड़ी संतान एक लड़का था स्वामी प्रसाद।तब जगदीश प्रसाद जी ने दूसरी शादी की उस पत्नी से उनके तीन लड़के तथा दो लड़कियां हुईं।
इतना बड़ा परिवार छोड़कर जगदीश प्रसाद जी उनकी पत्नियां परलोक चले गये।चारों भाइयों में मेल था। किन्तु स्वामी प्रसाद का परिवार भी बड़ा ही था सो उनके लड़कों ने उनसे इस मकान में न रहने को कहा।किन्तु स्वामी प्रसाद की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि दूसरा मकान बनवाते।लड़को ने अलग होने को दवाब डाला तो स्वामी प्रसाद ने अपने सौतेले भाइयों से बँटवारे की माँग रखी।भाई न माने तो स्वामी प्रसाद कोर्ट चले गये।उन्होंने कोर्ट से कहा कि,"चूँकि मैं अपने पिता की पहली पत्नी से इकलौता वारिस हूॅ अतः मकान के आधे हिस्से में मेरा कब्जा होता है"
बहुत दिनों तर्क-वितर्क होता रहा।किन्तु कोर्ट न मानी।स्वामी प्रसाद को मकान का एक चौथाई हिस्सा दे दिया।अन्य सौतेले तीनों भाइयों ने अफनी रज्जामंदी से बँटवारा कर लिया।नतीजा यह हुआ कि अब न तो बगिया है और न ही ऑगन।सब कुछ खत्म हो गया।
                      चरित्र हीन
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चरित्र हीनता का मतलब प्रायः हम उस पुरूष या स्त्री से रखतें हैं जो पर स्त्री या पर पुरुष से सम्बन्ध रखतें हैं।बात भी सही है किन्तु मेरा विचार है कि इसके साथ-साथ चरित्र हीनता के और भी कारण हैं मसलन,जबान का खराब होना,व्यवहार का अच्छा न होना, अहंकार करना आदि-आदि।है कि नहीं?बदजुबान व्यक्ति व्यवहार कुशल नहीं हो सकता।और अहंकारी अपनी दुनिया में खोया रहता है।वह दूसरों को अपने छोटा समझता है।वह भी व्यावहारिक नहीं सकता।आखिर जिसे हम वाकई चरित्र हीन कहतें हैं लोग उससे दूर ही रहतें हैं।ठीक यहीं बात और तरह के चरित्र हीनों पर भी तो लागू होती है। हम उनसे दूर ही रहतें हैं।उनसे घृणा करतें हैं।जिसे अंग्रेज़ी में कहें तो उनका,"SOCIAL BOYCOTT" कर देतें हैं।ठीक वैसे ही जैसे पर पुरुष या स्त्री से सम्बन्ध रखने वाले का। यह सब क्या है अन्य प्रकार की चरित्र हीनता तो है।
दुनिया उसीका ,"SOCIAL BOYCOTT" जिससे घृणा हो जाती है।हम लाख अपने को अच्छा समझतें हों लेकिन यदि ये कमियां हममें हैं हम चरित्र हीन ही कहे जायेंगे।पर पुरुष या स्त्री से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति जुबान का अच्छा,व्यवहार कुशल हो सकता है,अहंकार उसको हो जरूरी नहीं।लेकिन अन्य प्रकार के चरित्र हीन जुबान व व्यवहार से अकुशल तथा अहंकारी ही रहेगा।