Tuesday, October 8, 2019

यही दुनिया है
------------------
दूसरों में कमी खोजतें सभी,
अपनी कमी कोई खोजता ही नहीं,
दूसरों का किया याद रखतें हैं सभी,
अपना किया याद रखतें ही नहीं।
दूसरा गलत रहता है सोचतें हैं सभी,
खुद को गलत कोई समझता नहीं,
कैसा स्वभाव है मानव का यह,
मेरी समझ कुछ आता नहीं।
याद आतीं हैं अपनी अच्छाइयां ही,
दूसरों की अच्छाइयां याद आतीं नहीं,
हम ही सही हैं सोचतें हैं सभी,
दूसरा भी सही है हम सोचतें नहीं।
गर बुराई खोंजे खुद की हम,
तो खुद में केवल बुराई ही नजर आयेगी,
और दूसरे की अच्छाइयां खोंजे अगर,
तो दूसरों की केवल अच्छाइयां ही नजर आयेंगी।।

No comments:

Post a Comment