Friday, August 23, 2019

पागल कौन?


   पागल कौन?
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मैं सड़क पर जा रहा था,
देखा,
एक कम दिमाग का आदमी,
वह भी सड़क पर जा रहा था,
बिल्कुल चुपचाप देखा था उसको।
न किसी से बोल रहा था,
बिल्कुल बेफिक्र सा लगता था,
दुनिया से मतलब नहीं था,
लगता था उसका कोई दोस्त नहीं है।
धूप बहुत तेज थी उस दिन,
सूर्य देव भी कड़क रहे थे,
सबका बुरा हाल था उस दिन,
पसीना भी नहीं सूख रहा था।
लगता,
उसको प्यास लगी थी,
पर नल नहीं दिख रहा था,
चाय की एक दुकान खुली थी,
जब वह प्यास सह न पाया,
चाय की दुकान पर पहुंचा,
प्यास बुझाने को उसने,
पानी का एक मग उठाया।
दुकान वाला चिल्ला उठा तब,
"भागो भागो भाग यहाँ से,
साला पागल कहाॅ से आया,
मग यह गन्दा कर डालेगा।"
वह बेचारा मग को रखकर,
हट गया तुरन्त वहाॅ से,
पानी भी नहीं पी पाया था,
प्यासा ही रह गया बेचारा।
मैं यह सब देख रहा था,
शान्त भाव से रूक गया था,
जब वह मग को रख कर,
वहाँ से चलने को वापस हुआ।
मैंने देखा उस दुकानदार ने ही,
उस मग के पानी को,
उस पागल पर फेंक दिया था,
अब वह पागल गाली बकता,
दुकान वाला हँसने लगा था,
वहाँ जो भी बैठा था,
वह सब भी हँसने लगे थे।
तब मेरे कुछ समझ न आया,
आखिर पागल कौन यहाँ पर,
उसे कहूँ या इन्हें कहूँ,
दिमाग वाले होकर भी,
हम सब कितने पागल होंते हैं?

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

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