इस मंच के माध्यम से मैं, अपने जीवन में घटित हुए छोटे-बड़े अनुभवों और सीख दे जाने वाले लम्हो का साँझा कविता और लघु कहानियो के द्वारा करने की कोशिश कर रहा हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएंगे...सुधीर श्रीवास्तव
Sunday, January 26, 2020
नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
Thursday, January 23, 2020
भारत और मोदी
भारत और मोदी
यह भारत देश हमारा,
सारे जग से न्यारा है,
सभी धर्मों का समावेश यहाँ पर,
सभी को समान अधिकार मिला है,
इसीलिए तो भारत,
"माता"
कहलाता है।
मोदी जी की अगुवाई में,
उन्नति के मार्ग पर चल पड़ा है,
भारत में जो न हुआ कभी भी,
अब वह भी होने लगा है।
विश्व गुरु बनने की राह भी,
अब तो प्रशस्त हुई है,
जो सपना देखा भारत ने,
अब पूरा होने को है।
बस,
यही विनती है भारत की जनता से,
मोदी जी के हाथों को मजबूती दे,
और,
भारत को ऊँचाइयाँ छूने दे।
आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
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कविता
नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
Monday, January 20, 2020
माँ-बाप
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माँ-बाप इन दो शब्दों में ब्रम्हांड है माँ त्याग है तो बाप अनुशासन है।बाप अनुशासन सिखाता है तो माँ त्याग।जीवन के संघर्ष में दोनों का अलग-अलग महत्व है।बाप कभी-कभी मारता है तो सन्तान के लिए वह दुश्मन स्वरुप होता है लेकिन यदि देखा जायं तो यही मार जीवन-मार्ग पर चलना सिख्ती है।बाप दुश्मन होकर भी सबसे बड़ा मित्र होता है जिसे महत्व नहीं दिया जाता है।सच मानिए बाप बच्चों को मारता है तो बच्चे से अधिक कष्ट उसे ही होता है।लेकिन क्या अजीब विडम्बना है कि बड़े होकर बच्चे दोनो को भार समझने लगतें हैं।उन्हें पिछली पीढ़ी का समझने लगतें हैं लेकिन बच्चों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे पिछली पीढ़ी के ही सही लेकिन अनुभवी होतें हैं।अतः मैं तो कहूँगा कि उनका निरादर करने के बजाय बच्चों को उनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए।
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माँ-बाप इन दो शब्दों में ब्रम्हांड है माँ त्याग है तो बाप अनुशासन है।बाप अनुशासन सिखाता है तो माँ त्याग।जीवन के संघर्ष में दोनों का अलग-अलग महत्व है।बाप कभी-कभी मारता है तो सन्तान के लिए वह दुश्मन स्वरुप होता है लेकिन यदि देखा जायं तो यही मार जीवन-मार्ग पर चलना सिख्ती है।बाप दुश्मन होकर भी सबसे बड़ा मित्र होता है जिसे महत्व नहीं दिया जाता है।सच मानिए बाप बच्चों को मारता है तो बच्चे से अधिक कष्ट उसे ही होता है।लेकिन क्या अजीब विडम्बना है कि बड़े होकर बच्चे दोनो को भार समझने लगतें हैं।उन्हें पिछली पीढ़ी का समझने लगतें हैं लेकिन बच्चों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे पिछली पीढ़ी के ही सही लेकिन अनुभवी होतें हैं।अतः मैं तो कहूँगा कि उनका निरादर करने के बजाय बच्चों को उनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए।
नमस्कार मित्रो, मेरा नाम सुधीर श्रीवास्तव है, मैं प्रयागराज निवासी हूँ और यूपी रोडवेज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्य रत हूँ| अपने 59 साल के जीवन काल में, सभी के तरह मैंने भी बहुत से उतार चढ़ाव देखे है और सभी लम्हो से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की है, अब जीवन के इस पड़ाव में, मैं अपने उन लम्हों का साँझा कविता तथा कहानियो के माध्यम से इस मंच पे करने का प्रयास कर हूँ, उम्मीद है, आपको पसंद आएगी|
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