Thursday, July 11, 2019

जब माँ घर आयी


जब माँ घर आयी


माँ गांव से शहर मेरे घर आईं थीं, आने को तैयार नहीं थीं पर मेरे और बच्चों के कहने पर आईं, वह भी जब मैं लेने गया। गांव की बूढ़ी महिला जमाने के हिसाब से पिछड़ी हुई और मेरी पत्नी शहर की, सो, माँ उसे पसंद नहीं आतीं थीं। उसने माँ को लाने में बहुत आनाकानी की थी, लेकिन मेरे और बच्चों की जिद के कारण अनमने मन से तैयार हुई थी।माँ ने आते ही कहा, "बेटा, बहू  दुबली हो गई है, इसका ध्यान नहीं देते क्या?"
मैंने कहा, "नहीं माँ ऐसी बात तो नहीं, हाँ इसे मेहनत अधिक करनी पड़ती है। सुबह बच्चों को स्कूल और मुझे ऑफिस भेजना. फिर खुद तैयार होकर अपने ऑफिस जाना होता है, शाम को तो हम दोनो मिलकर काम निपटा लेते हैं पर सुबह नही, माँ ने सब जान लिया। दूसरे दिन वह खुद रसोई में जा घुसीं, अभी हम सब सो ही रहे थे।बर्तनों की खछ़खड़ाहट से नींद टूटी तो देखा माँ नाश्ता तथा भोजन तैयार कर रहीं थीं।
पत्नी बड़बड़ाई, "लो,मधुर संगीत सुनो, नींद तोड़ प्यारा संगीत।"
मैंने कहा, "अरे माँ, क्या करती हो?"
माँ कुछ बोलीं नहीं,अपने काम में लगी रहीं।
उस दिन बहुत दिन बाद माँ के हाथ का 
स्वादिष्ट नाश्ता व भोजन मिला था।बच्चों ने भी पसंद किया, छोटा बोला, "दादी अब आप कहीं मत जाइयेगा, इतना अच्छा खाना आप बनातीं हैं, पहली बार खा रहा हूॅ।"
माँ के चेहरे पर एक संतोष था, पत्नी के चेहरे पर कुढ़न और मेरी ऑखों में ऑसू।
कुछ दिन ठीक-ठाक रहा फिर पत्नी का व्यवहार बदलने लगा, माँ को ओछी निगाह से देखने लगी बात-बात पर चिढ़ने लगीं, बच्चों को कुछ अधिक ही डाँट-डपट करने लगी, मुझे भी नहीं छोड़ती। माँ सब देख सुन रही थीं, लेकिन कुछ बोलती नहीं थीं।
एक दिन मैं ऑफिस से आया तो देखा माँ पत्नी का सर गोद में रखकर उसका सर दबा रहीं थीं, बिल्कुल अपनी बेटी की तरह, मेरे कुछ बोलने से पहले ही माँ बोल पड़ीं, "बहू का बिलकुल ध्यान नहीं रखते हो तुम, बेचारी का सर दर्द कर रहा है।"
मैं बोला, "माँ,अभी दवा लाता हूॅ, ठीक हो जाएगा।"
माँ ने कहा, "आओ, यहाँ बैठो मेरे पास।"
मैं बैठ गया, मेरी गोद में पत्नी का सर रखकर बोलीं, "बेटा मैं गाँव की अनपढ़ गँवार औरत जरूर हूॅ, लेकिन जिन्दगी का अनुभव जितना मुझे है तुम लोगों को नहीं, हर मर्ज की दवा दवा नहीं होती एक प्यारा सा हल्का स्पर्श पति-पत्नी के सारे मर्ज दूर कर देता है।"
इतना कहकर माँ चाय बनाने चलीं गयीं, आज मैंने देखा पत्नी की ऑखों के कोरों से ऑसू बह रहे थे और मेरे हाथ खुद ब खुद उसके सर को सहला रहे थे।


आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव


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