Wednesday, September 18, 2019

               आओ हम महक जायें
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थोड़ा मैं महक जाऊँ,
थोड़ा तुम महक जाओ,
यह फिज़ा यह दिशा,
महक जाये।
अपनी महक से,
हम वातावरण महका दें,
गुलाब मैं बन जाऊँ,
चमेली तुम बन जाओ।
इस दुनिया में,
हम निशानी छोड़ जायें,
महक में हमारी,
यह जहाँ डूब जाये।
उबर न सके जहाँ,
हमारी महक से,
इस जहाँ को इसमें,
इस कदर हम डूबें दैं।

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