जय श्री राम
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जय राम जय राम रमैया,
दुनिया में तुम अद्भुत हो,
नहीं कोई ऐसा नर देखा,
जो पुरूषोत्तम कहलाता हो।
तोड़ा शिव-धनुष भरी सभा में,
परशुराम क्रोध में बहुत आये,
लेकिन जब तुमको जाना,
नतमस्तक हुए तुरन्त ही।
भक्तों के प्रति श्रद्धा थी तुमको,
शबरी के जूठे फल खाये थे,
हनुमान की भक्ति पर,
उनको भरत समान मान लिया।
श्याम वर्ण हे धनुष धारी,
अहं रावण का चूर करने वाले,
हे पुरूषोत्तम जय श्री राम,
सीता सहित है तुमको प्रणाम।।
आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
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