Friday, November 8, 2019

घर वापसी

घर वापसी
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Saas Bahu
किरण को और अधिक सहना भारी पड़ रहा था। घर है कि कबाड़खाना, जब देखो काम-काम बस काम ही काम, राजेश को कार्यशाला आठ बजे पहुंचना होता है, कार्यशाला भी घर से साठ किलोमीटर दूर है और बस से जातें हैं राजेश सो सुबह साढ़े पाँच ही बजे उठना पड़ता है किरण को, राजेश को तैयार करके ऑफिस भेजना उसके बाद    दो साल की बिटिया उठ जाती है। उसे देखना, फिर सत्तर-बहत्तर साल के सास-ससुर को देखना। नाश्ता-पानी भोजन आदि-आदि। चूंकि सास-ससुर बूढ़े हैं मदद तो करतें नहीं ऊपर से उनके साथ कुछ न कुछ लगा ही रहता है।  दो साल की बेटी के साथ भी कुछ न कुछ लगा ही रहता है। परिवार में पाँच व्यक्ति हैं, राजेश,
सास ससुर, बिटिया और खुद किरण। पाँचों का खान-पान अलग-अलग समय अलग-अलग, किरण ने राजेश से अलग होने को कई बार कहा पर राजेश कहतें, माँ-बाप की उम्र देखती हो कि नहीं? उन्हें छोड़कर कैसे अलग हो जाऊँ?"
आखिर एक दिन ऐसा भी आया कि किरण ने सास-ससुर के लिए कुछ भी करना बन्द कर दिया। वे बेचारे खुद बनाने-खाने लगे। किरण झांकने भी नहीं जाती। राजेश ने किरण को टोंकना शुरू किया। जब किरण पर कोई असर नहीं पड़ा तो एक दिन एक तमाचा जड़ दिया।
किरण को अपने मायके पर बड़ा गर्व था। गुस्से में मायके आ गई। यहाँ पर सभी ने राजेश को न देखकर उससे उसके बारे में पूछना शुरू किया। किरण ने सही-सही बता दिया। किरण के पिताजी बोले, "अभी इसी वक्त जैसे आई हो वापस चली जाओ अपने घर।क्या तुम सास-ससुर की सेवा नहीं करोगी? आखिर तुम्हारे भाइयों की बीवियों को हमारी देख-रेख करनी होगी या नहीं? या तुमको देखेंगी?  एक बात तो याद रखना राजेश के बिना इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है न तो ससुराल वालों से बिगाड़ रखकर।"

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

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