Sunday, October 6, 2019

                      चरित्र हीन
                   ----------------
चरित्र हीनता का मतलब प्रायः हम उस पुरूष या स्त्री से रखतें हैं जो पर स्त्री या पर पुरुष से सम्बन्ध रखतें हैं।बात भी सही है किन्तु मेरा विचार है कि इसके साथ-साथ चरित्र हीनता के और भी कारण हैं मसलन,जबान का खराब होना,व्यवहार का अच्छा न होना, अहंकार करना आदि-आदि।है कि नहीं?बदजुबान व्यक्ति व्यवहार कुशल नहीं हो सकता।और अहंकारी अपनी दुनिया में खोया रहता है।वह दूसरों को अपने छोटा समझता है।वह भी व्यावहारिक नहीं सकता।आखिर जिसे हम वाकई चरित्र हीन कहतें हैं लोग उससे दूर ही रहतें हैं।ठीक यहीं बात और तरह के चरित्र हीनों पर भी तो लागू होती है। हम उनसे दूर ही रहतें हैं।उनसे घृणा करतें हैं।जिसे अंग्रेज़ी में कहें तो उनका,"SOCIAL BOYCOTT" कर देतें हैं।ठीक वैसे ही जैसे पर पुरुष या स्त्री से सम्बन्ध रखने वाले का। यह सब क्या है अन्य प्रकार की चरित्र हीनता तो है।
दुनिया उसीका ,"SOCIAL BOYCOTT" जिससे घृणा हो जाती है।हम लाख अपने को अच्छा समझतें हों लेकिन यदि ये कमियां हममें हैं हम चरित्र हीन ही कहे जायेंगे।पर पुरुष या स्त्री से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति जुबान का अच्छा,व्यवहार कुशल हो सकता है,अहंकार उसको हो जरूरी नहीं।लेकिन अन्य प्रकार के चरित्र हीन जुबान व व्यवहार से अकुशल तथा अहंकारी ही रहेगा।

Saturday, October 5, 2019

जय श्री राम

   जय श्री राम
-------------------
Lord ram

जय राम जय राम रमैया,
दुनिया में तुम अद्भुत हो,
नहीं कोई ऐसा नर देखा,
जो पुरूषोत्तम कहलाता हो।
तोड़ा शिव-धनुष भरी सभा में,
परशुराम क्रोध में बहुत आये,
लेकिन जब तुमको जाना,
नतमस्तक हुए तुरन्त ही।
भक्तों के प्रति श्रद्धा थी तुमको,
शबरी के जूठे फल खाये थे,
हनुमान की भक्ति पर,
उनको भरत समान मान लिया।
श्याम वर्ण हे धनुष धारी,
अहं रावण का चूर करने वाले,
हे पुरूषोत्तम जय श्री राम,
सीता सहित है तुमको प्रणाम।।

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

ऐसे ही और कहानियां पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

Friday, October 4, 2019

जय माता रानी

    जय माता रानी
 ---------------------

Goddess Durga

तुम आई हो द्वार मेरे,
मन प्रफुल्लित हो गया,
देख नहीं पाता हूॅ तुमको,
पर अनुभव तो करता हूॅ।
एक नयी शक्ति का होता है संचरण,
सुख-संपत्ति लेकर आई हो,
आशा यह होती है,
नवजीवन मुझको तुम दोगी।
आशा इसकी भी होती है,
शक्ति का अपने प्रयोग करोगी,
कष्ट दुःख अब सब हर लोगी,
कपट भी हमसे दूर रहेगा,
अहं मेरा मिट जायेगा।
नौ दिन पृथ्वी पर रहकर,
अपने धाम चली जाओगी,
लेकिन इन दिनों की छाया,
हमेशा हम पर रखोगी।

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

ऐसे ही और कहानियां पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे