Thursday, January 23, 2020

भारत और मोदी

भारत और मोदी
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Modi and Bharat mata



यह भारत देश हमारा,
सारे जग से न्यारा है,
सभी धर्मों का समावेश यहाँ पर,
सभी को समान अधिकार मिला है,
इसीलिए तो भारत,

"माता"

कहलाता है।
मोदी जी की अगुवाई में,
उन्नति के मार्ग पर चल पड़ा है,
भारत में जो न हुआ कभी भी,
अब वह भी होने लगा है।
विश्व गुरु बनने की राह भी,
अब तो प्रशस्त हुई है,
जो सपना देखा भारत ने,
अब पूरा होने को है।
बस,
यही विनती है भारत की जनता से,
मोदी जी के हाथों को मजबूती दे,
और,
भारत को ऊँचाइयाँ छूने दे।

आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव

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Monday, January 20, 2020

                   माँ-बाप
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माँ-बाप इन दो शब्दों में ब्रम्हांड है माँ त्याग है तो बाप अनुशासन है।बाप अनुशासन सिखाता है तो माँ त्याग।जीवन के संघर्ष में दोनों का अलग-अलग महत्व है।बाप कभी-कभी मारता है तो सन्तान के लिए वह दुश्मन स्वरुप होता है लेकिन यदि देखा जायं तो यही मार जीवन-मार्ग पर चलना सिख्ती है।बाप दुश्मन होकर भी सबसे बड़ा मित्र होता है जिसे महत्व नहीं दिया जाता है।सच मानिए बाप बच्चों को मारता है तो बच्चे से अधिक कष्ट उसे ही होता है।लेकिन क्या अजीब विडम्बना है कि बड़े होकर बच्चे दोनो को भार समझने लगतें हैं।उन्हें पिछली पीढ़ी का समझने लगतें हैं लेकिन बच्चों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे पिछली पीढ़ी के ही सही लेकिन अनुभवी होतें हैं।अतः मैं तो कहूँगा कि उनका निरादर करने के बजाय बच्चों को उनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए।

Saturday, January 18, 2020

                       मेल
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आज के जमाने में शादी हो जाने के बाद दो भाई मेल से रहें आश्चर्यजनक है न?लेकिन आनंद बाबू और उनके भाई ठीक इसके विपरीत हैं।आनंद जी सीधे-सादे नौकरीपेशा साधारण पुरूष हैं उनके भाई गांव में खेतीबाड़ी का कार्य करते हैं।चूँकि गांव में पढ़ाई-लिखाई की अच्छी व्यवस्था नहीं है।अतः भाई के दोनों लड़कों और एक लड़की को आनंद जी ने शहर में अपने पास रखा।अपनी ही संतानों की तरह उन्हें पढ़ाया-लिखाया।उनका सारा खर्च आनंद जी ही उठातें हैं।भाई केवल खेतीबाड़ी करता है।अपने और आनंद जी के परिवार के लिए राशन की व्यवस्था वही करता है।दोनों घरों के अन्य खर्च आनंद जी उठाते हैं।अभी हाल ही में तो भाई की लड़की की शादी हुई है सारा खर्च आनंद जी ने ही तो उठाया था।भाई ने मेहमानों के भोजन-पानी की व्यवस्था की थी।इसीप्रकार आनंद जी के परिवार में कोई अवसर आता है तो भाई ही आनंद जी के सारे मेहमानों के भोजन की व्यवस्था करता है जबकि आनंद जी अन्य खर्च उठाते हैं।
      भाई के दोनों लड़कों को पढ़ा-लिखा कर उनके सरकारी अधिकारी बनने तक उनका पूरा खर्च आनंद जी ने ही तो उठाया है बिना किसी भेदभाव के।भाइयों के इस मेल की चर्चा दूर-दूर तक होती है और मिसाल दी जाती है।