ऊँ श्री लक्ष्मी देवी माताय नमः
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माँ लक्ष्मी,
तुम जगत्माता हो।
द्वार मेरे तुम आओ न,
आस लगाये बैठा हूॅ,
हाथ पसारे राह ताक रहा हूॅ,
अंखियां थक गयीं तकते-तकते।
रूप तुम्हारा अति प्यारा है,
महिमा तुम्हारी अति न्यारी है,
जानता हूॅ संतोष न होगा,
जितना आओ मेरे घर में।
भण्डार बड़ा नहीं है मेरा,
पर खाली खाली लगता है,
तुम बिन तो माता,
यह जग सूना सूना लगता है।
जग तुम्हारा दास बना है,
आगे-पीछे भाग रहा है,
जिसको भी मैंने देखा,
तुम्हारी चाहत रखता है।
न रखो हाथ मेरे सर पर,
चरण-रज ही रख दो माता,
मैं धन्य हो जाऊँगा,
रज तुम्हारे चरणों की पाकर।।
माँ लक्ष्मी,
तुम जगत्माता हो।।
आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
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