विद्वेष
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एक दिन महेश ने शीला से पूछ ही लिया, "दीपक तुम्हारा कौन है? तुम्हारा उससे रिश्ता क्या है सही-सही बताओ।"
शीला बोली, "महेश, तुमने शक करके अच्छा नहीं किया. मैं तुमसे प्यार करती हूॅ , बेइन्तहा करती हूॅ, लेकिन तुमने मुझ पर शक किया सच्चे प्यार में शक! इसकी यही सजा है कि मैं तुमसे शादी न करूं और सुनो तुमसे शादी नहीं की तो क्वांरी ही रहूंगी, रही दीपक की बात? तो सुनो हम दोनों ने भाई-बहन के अलावा कुछ नहीं समझा।"
आज के लिए इतना ही...धन्यवाद
अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट और शेयर करें... सुधीर श्रीवास्तव
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