Wednesday, October 30, 2019

विद्वेष

विद्वेष
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Love Traingle

कभी-कभी व्यक्ति विद्वेष के कारण अर्थ का अनर्थ सोच लेता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले रिश्ते की गहराई तक जाना चाहिए। महेश को शीला और दीपक का एक साथ रहना अच्छा नहीं लगता था क्योंकि वह शीला से बेइन्तहा प्यार करता था।शीला को दीपक के साथ हँसते-बोलते देखकर वह जल भुन जाता था। ऐसा नहीं कि शीला महेश से प्यार नहीं थी करती थी दिलो-जान से महेश को चाहती थी। यह बात महेश जानता भी था। ऐसी हालत में शीला का दीपक के साथ हँसना-बोलना उसे अच्छा न लगना लाज़िमी हो जाता है न?
एक दिन महेश ने शीला से पूछ ही लिया, "दीपक तुम्हारा कौन है? तुम्हारा उससे रिश्ता क्या है सही-सही बताओ।"
शीला बोली, "महेश, तुमने शक करके अच्छा नहीं किया. मैं तुमसे प्यार करती हूॅ , बेइन्तहा करती हूॅ, लेकिन तुमने मुझ पर शक किया सच्चे प्यार में शक! इसकी यही सजा है कि मैं तुमसे शादी न करूं और सुनो तुमसे शादी नहीं की तो क्वांरी ही रहूंगी, रही दीपक की बात? तो सुनो हम दोनों ने भाई-बहन के अलावा कुछ नहीं समझा।"

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Friday, October 25, 2019

दीपावली आने वाली है

दीपावली आने वाली है
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Diwali


दशहरा गया,
दीपावली आने वाली है,
स्वागत लक्ष्मी-गणेश का करना है,
घर-घर साफ हो रहा,
स्वागत की तैयारी है, 
वे आयें या न आयें,
स्वागत तो करना ही है।
मन में उमंग जैसी है,
दीपमाला सजानी है,
और दारिद्र दूर करने की कामना,
उनसे करनी है,
अच्छा है, 
घर-ऑगन साफ करें हम,
लेकिन मन?
वह भी तो साफ होना चाहिए।।

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Wednesday, October 23, 2019

ऊँ श्री लक्ष्मी देवी माताय नमः

ऊँ श्री लक्ष्मी देवी माताय नमः
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Laxmi mata

माँ लक्ष्मी, 
तुम जगत्माता हो।
द्वार मेरे तुम आओ न,
आस लगाये बैठा हूॅ, 
हाथ पसारे राह ताक रहा हूॅ, 
अंखियां थक गयीं तकते-तकते।
रूप तुम्हारा अति प्यारा है, 
महिमा तुम्हारी अति न्यारी है, 
जानता हूॅ संतोष न होगा,
जितना आओ मेरे घर में।
भण्डार बड़ा नहीं है मेरा,
पर खाली खाली लगता है, 
तुम बिन तो माता, 
यह जग सूना सूना लगता है।
जग तुम्हारा दास बना है,
आगे-पीछे भाग रहा है, 
जिसको भी मैंने देखा, 
तुम्हारी चाहत रखता है।
न रखो हाथ मेरे सर पर, 
चरण-रज ही रख दो माता, 
मैं धन्य हो जाऊँगा, 
रज तुम्हारे चरणों की पाकर।।
माँ लक्ष्मी, 
तुम जगत्माता हो।।

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