Friday, November 1, 2019

एक दीपावली ऐसी भी

एक दीपावली ऐसी भी

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इधर कुछ ऐसा संयोग बैठ जाता था कि विद्या के घर कोई त्यौहार नहीं मनाया जाता था।पिछले साल सास मर गयी थीं तो उसके पिछले साल ससुर जी।अतः दोनों साल कोई त्यौहार नहीं मनाया गया।अब इस साल पति की चाची मर गयीं अतः इस साल भी त्यौहारों पर रोक लग गयी लेकिन बच्चें तो बच्चें ही होंते हैं न कहाँ मानने वाले थे।दीपावली की तैयारी में लगे थे।घर-ऑगन साफ किया एक घरौंदा बनाया।उनके पिता मना करते रह गये पर कहाँ मानने वाले थे।विद्या ने पटाखे और दीये मंगवा दिये।बच्चें उन्हें सजाने लगे।पति ने मना किया तो बोली,"बच्चों का मन कैसे तोड़ दूं।घुटन सी महसूस हो रही है न? दो साल बिना त्यौहार के बीत गये। कहते हुए उसने सभी दरवाजे और खिड़कियां खोल दी ताकि ताजी हवा अन्दर आ सके।


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Wednesday, October 30, 2019

                कानाफूसी मत कीजिये
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जी हाँ,
          कभी भी, कानाफूसी मत कीजिये।मैंने बहुत से लोगों को देखा है कि बातचीत के दौरान कानाफूसी करतें हैं।कानाफूसी जहाँ एक ओर दूसरों की शिकायत करने का द्योतक है तो दूसरी ओर दूसरों का मजाक उड़ाने का।कानाफूसी के दौरान हम अपनी वास्तविक आवाज का प्रयोग न करके बनावटी धीमी आवाज का प्रयोग करतें हैं जिसका सीधा असर हमारे दिल दिमाग तथा शरीर पर पड़ता है।कानाफूसी के दौरान हमें डर रहता है कि हमारी बातें अमुक व्यक्ति न सुन ले जो हमारे दिल पर सीधा प्रभाव डालता है। कानाफूसी में दिल और दिमाग दोनों को ही कन्ट्रोल करना पड़ता है जो हमारी काफी ऊर्जा को बर्बाद कर देता है।कान भी धीमी आवाज सुनने के आदी हो जातें हैं जिससे दिमाग पर अतिरिक्त दवाब पड़ता है जिससे हमारी जिन्दगी कम हो जाती है।

विद्वेष

विद्वेष
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Love Traingle

कभी-कभी व्यक्ति विद्वेष के कारण अर्थ का अनर्थ सोच लेता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले रिश्ते की गहराई तक जाना चाहिए। महेश को शीला और दीपक का एक साथ रहना अच्छा नहीं लगता था क्योंकि वह शीला से बेइन्तहा प्यार करता था।शीला को दीपक के साथ हँसते-बोलते देखकर वह जल भुन जाता था। ऐसा नहीं कि शीला महेश से प्यार नहीं थी करती थी दिलो-जान से महेश को चाहती थी। यह बात महेश जानता भी था। ऐसी हालत में शीला का दीपक के साथ हँसना-बोलना उसे अच्छा न लगना लाज़िमी हो जाता है न?
एक दिन महेश ने शीला से पूछ ही लिया, "दीपक तुम्हारा कौन है? तुम्हारा उससे रिश्ता क्या है सही-सही बताओ।"
शीला बोली, "महेश, तुमने शक करके अच्छा नहीं किया. मैं तुमसे प्यार करती हूॅ , बेइन्तहा करती हूॅ, लेकिन तुमने मुझ पर शक किया सच्चे प्यार में शक! इसकी यही सजा है कि मैं तुमसे शादी न करूं और सुनो तुमसे शादी नहीं की तो क्वांरी ही रहूंगी, रही दीपक की बात? तो सुनो हम दोनों ने भाई-बहन के अलावा कुछ नहीं समझा।"

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